“अपेक्षायें क्या हैं ? मानवजाति के लिये प्रेम, सब के प्रति सत्यनिष्ठा, विश्व के मानवों के प्रति एकत्व की भावना का अनुचिन्तन, लोकोपकार, ईश्वर के प्रेम की ज्वाला से प्रज्ज्वलित होना, ईश्वर के ज्ञान को प्राप्त करना, और वह जो मानव-कल्याण के लिये सहायक हो।”

— अब्दुल-बहा

बहाई शिक्षाओं की मूल अवधारणा यह है कि व्यक्ति के आंतरिक चरित्र का परिष्कार किया जाये और मानवजाति की सेवा की जाये, ये दोनों जीवन के अभिन्न पहलू हैं । शोगी एफेंदी की ओर से लिखे गये एक पत्र में कहा गया है:

“हम मानव-हृदय को अपने बाहर के माहौल से अलग कर यह नहीं कह सकते कि एक बार जब इनमें से कोई एक सुधर जायेगा तो सब कुछ सुधर जायेगा। मनुष्य संसार से जैविक रूप से जुड़ा है। उसका आन्तरिक जीवन माहौल को बदल देता है और ख़ुद भी इससे अत्यधिक प्रभावित होता है। दोनों एक-दूसरे पर प्रभाव डालते हैं और मनुष्य के जीवन में प्रत्येक स्थायी परिवर्तन इन स्वाभाविक प्रतिक्रियों का परिणाम है।”

इस संदर्भ में, बहाई उस दोहरे उद्देश्य के क्रियान्वयन को समझ पाये हैं जो उनके जीवन का मूलभूत तथ्य है: अपने खुद के आध्यात्मिक और बौद्धिक विकास का ध्यान करना और समाज के रूपांतरण में योगदान देना।

यह दोहरा उद्देश्य बहाईयों को सभी क्षेत्रों में अपने प्रयत्नों को सुनियोजित करने में मदद करता है। इस प्रकार, उदाहरण के लिये, उनसे केवल यह उम्मीद नहीं की जाती है कि वे प्रार्थना और चिन्तन अपने व्यक्तिगत दैनिक जीवन में करें, अपितु अपने आस-पड़ोस में भी भक्तिमय भावना का संचार करें ; उनसे कहा जाता है, प्रभुधर्म के केवल अपने ज्ञान को गहन न करें, अपितु दूसरों से भी बहाउल्लाह की शिक्षाओं को साझा करें ; उन्हें न केवल यह सलाह दी जाती है कि वे अपने जीवन से ही अहंकार को निकाल फेंकें, अपितु यह भी साहस और विनम्रता के साथ कोशिश करें कि उस संस्कृति को भी उल्टी दिशा में मोड़ दें जो आत्म-संतुष्टि की महिमा का बखान करती हो और एकता की जड़ को ही उखाड़ फेंकती हो।

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