बहाउल्लाह के भौतिक अवशेष की चिरविश्राम स्थली बहजी में है, जो बहाईयों के लिए धरती पर सर्वाधिक पवित्र स्थान है।

बहाउल्लाह - दिव्य शिक्षक

अपने अनुयायियों के बीच आत्मानुशासन, भक्ति और वीरता का भाव उत्पन्न कर पूरे इतिहास के दौरान महान धर्मों ने मानव-चरित्र को सभ्य बनाने के लिये प्रमुख प्रेरणा-शक्ति प्रदान की है , धर्म के अनेक नैतिक सिद्धांत आचरण के ढाँचों और प्रतिमानों के रूप में ढाले गये हैं जिसने मानव-सम्बन्धों को उन्नत करने और मानवजाति के सामूहिक जीवन को आगे बढ़ाने का काम किया है।

जब कभी भी एक ईश्वर का अवतार आते है तो मानवजाति के उद्बोधन और विकास के अगले चरण के लिये प्रेरणा का पूरा पैमाना दुनिया में प्रकाशित किया जाता है। बाहरी तौर पर बिल्कुल साधारण एक मनुष्य को ईश्वर के प्रवक्ता के रूप में आहूत किया जाता है। मूसा के किसी ‘प्रज्ज्वलित झाड़ी’ के समक्ष खड़े होने, ‘बोधिवृक्ष’ के नीचे बुद्ध के ज्ञान प्राप्त करने, एक फाख्ता के रूप में ईसामसीह पर ‘पवित्र चेतना’ के अवतरित होने, अथवा महादूत ‘ग्रैब्रियल’ को मुहम्मद के समक्ष आने के बारे में सोच सकते हैं।

19वीं शताब्दी के मध्य में ईश्वर ने बहाउल्लाह, अर्थात ’ईश्वर की महिमा‘ का आह्वान मानवजाति को एक नया ‘प्रकटीकरण’ देने के लिये किया। ‘उनकी’ लेखनी से चार दशकों तक हज़रों पातियाँ, पत्र और पुस्तकें प्रवाहित हुईं। अपने पावन लेखों में उन्होंने विश्व-सभ्यता के विकास की एक रूपरेखा दी जो मानव-जीवन के दोनों - आध्यात्मिक और भौतिक पहलुओं की चर्चा है।

मैंने कभी भी सांसारिक नेतृत्व की कामना नहीं की। मेरा एकमात्र उद्देश्य मनुष्य को वह देने का रहा है जिसे देने का आदेश मुझे ईश्वर द्वारा दिया गया है...।

— बहाउल्लाह

बहाउल्लाह ने मानवजाति के लिये ईश्वर का नवीनतम संदेश लाने के लिये चालीस साल की कैद, उत्पीड़न और निष्कासन की यातना सहीं। आज पूरी दुनिया में ‘उनका’ जीवन और उद्देश्य बड़ती हुई संख्या में लोगों के बीच सुप्रसिद्ध हो रहा है। दुनिया की बेहतरी के लिये लाखों लोग ‘उनकी’ शिक्षाओं को व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन में उतारना सीख रहे हैं।


बहाउल्लाह की शिक्षायें... अब हमारे समक्ष धार्मिक शिक्षा का उच्चतम् और पवित्रतम् स्वरूप प्रस्तुत करती हैं।

— काउंट लिओ टॉलस्टॉय, रूसी लेखक


इस विषय की छान-बीन

लेखों का यह संकलन बहाउल्लाह के जीवन और संदेश का विवरण प्रस्तुत करता है, उनके जीवनकाल में बहाई समुदाय के विकास की कथा कहता है और उनके लेखों के संकलन उद्धृत करता है।

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