शोगी एफेंदी द्वारा सन् 1952 में तैयार किया गया नक्शा जिसमें बहाई धर्म के विश्वव्यापी विकास को दर्शाया गया है।

किसी भी धार्मिक प्रणाली की प्राथमिकताओं की सूची में सबसे ऊपर इसके ग्रंथ के सिद्धांत का निर्धारण और इन पावन लेखों को व्यक्ति तथा समुदाय के जीवन की परिस्थितियों के अनुकूल लागू करना आवश्य होना चाहिये। अब्दुल-बहा के बहाई लेखों के एकमात्र अधिकारिक व्याख्याता होने से बल प्राप्त कर शोगी एफेंदी ने बहाई ग्रंथो के परिप्रेक्ष्य में विश्व की घटनाओं का अध्ययन किया और उन विश्लेषणों के परिणामों को बहाई समुदायों के साथ पत्रों के रूप में साझा किया। पावन लेखों के व्याख्याता के रूप में उनकी भूमिका बहाई धर्म के विकास में अपार महत्व की थी, जिसने आज तक व्याख्या की एकता को आश्वस्त किया और जिसने समुदाय को खंडित होने से संरक्षित रखा।

उसी समय, दुनिया भर की नवजात बहाई संस्थाओं ने अनेक प्रकार के विषयों से सम्बन्धित प्रश्नों की भरमार लगा दी और इन प्रश्नों के उत्तर ने भी बहाउल्लाह के प्रकटीकरण की व्याख्या का महत्वपूर्ण भाग बनाया है।

कोई 26000 पत्रों और हज़ारों तार के माध्यम से शोगी एफेंदी ने मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और प्रेरणा लोगों को और बहाई संस्थाओं के विभिन्न समूहों को दी।

धर्मसंरक्षक अक्सर “आपका सच्चा बंधु” के साथ अपने पत्रों पर हस्ताक्षर किया करते थे।

इनमें लगभग आधे पत्र फारसी और अरबी में लिखे गये। अनगिनत विषयों और धारणाओं को सूक्ष्म, सुंदर और प्रभावशाली भाषा में शोगी एफेंदी ने स्पष्ट किया, विधानों और प्रभुधर्म के मौलिक सत्य को समझाया, विश्व न्याय मंदिर की ज़िम्मेदारियों की ख़ास विशेषताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की, स्थानीय और राष्ट्रीय सभाओं के चुनाव तथा कार्य को निर्दिष्ट किया और व्यक्तिगत रूप से बहाइयों के कर्तव्यों की व्याख्या की।

पत्रों में कुछ तो इतने लम्बे हैं कि पूरी एक पुस्तक का आकार ग्रहण कर लें। उनके सर्वाधिक महत्व के पत्रों और संदेशों के संकलन अनेक पुस्तकों में हैं। 1929 से 1936 के बीच लिखे गये उनके सात पत्र बहाउल्लाह की विश्व व्यवस्था शीर्षक से प्रकाशित पुस्तक में संकलित हैं। इनमें धर्मसंरक्षक ने बहाई धर्म के मूल सिद्धांत सम्बन्धी सत्यता को स्पष्ट किया है, विश्व में इसके उद्देश्य की छान-बीन की है, केन्द्रीय विभूतियों के सच्चे स्थानों की व्याख्या प्रस्तुत की है और बहाई संस्थाओं की संरचना तथा आदेश को प्रस्तुत किया है।

शोगी एफेंदी का एक अन्य पत्र, जिसका प्रकाशन दिव्य न्याय का अवतरण (25 दिसम्बर, 1998) शीर्षक से किया गया है, बहाईयों का आह्वान आस्था की दृढ़ता, भाषा में संयम और आचरण में साधुता के लिये प्रसिद्ध है। जो उनके सामने आने वाले दायित्वों को पूरा करने के लिये आवश्यक हैं। तीन साल बाद पूरे विश्व में युद्ध का माहौल बना, तब प्रकटित एक पत्र, प्रतिज्ञापित दिवस आ गया है (28 मार्च 1941) के रूप में प्रकाशित किया गया जिसमें बहाइयों को ग्रंथ दिये जाने के उद्देश्य, मार्गदर्शन और जिस दैत्याकार उथल-पुथल को मानवजाति देख रही है उसकी ज़रूरत के बारे में समझाया तथा एकबार फिर उन्हें आश्वस्त किया।

नवयुग की पहली शताब्दी (गौड पासेज़ बाई)

शोगी एफेंदी ने अपने जीवन काल में प्रचुर रचनायें लिखीं।

सन् 1940 में शोगी एफेंदी ने बहाई इतिहास की घटनाओं पर अपना ध्यान केन्द्रित किया और सन् 1944 में, बाब की घोषणा की शताब्दी के स्मरणोत्सव के अवसर पर नवयुग की पहली शताब्दी (गौड पासेज़ बाई) का उन्होंने विमोचन किया, जो बाब की पहली घोषणा के उद्देश्य से लेकर पहली सात वर्षीय योजना के समापन तक की पूरी एक शताब्दी का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।

इसके साथ-साथ शोगी एफेंदी ने एक समरूप पुस्तक फारसी भाषा में लिखी जो समान रूप से बहाई धर्म के इतिहास की समीक्षा करती है और बहाउल्लाह के लेखों में अन्तर्निहित विश्व व्यवस्था के विशेष तत्वों की व्याख्या करती है।

अनुवाद कार्य

शोगी एफेंदी ने बहाई धर्म के प्रमुख अनुवादक के रूप में काम किया। बचपन से ही उन्होंने अंग्रेजी की पढ़ाई की थी और बड़े होने पर उन्होंने अपनी पढ़ाई बेरूत के अमरिकी विश्वविद्यालय में जारी रखी और बाद में उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दाखि़ला लिया, जहाँ वह सन् 1921 में अब्दुल-बहा की मृत्यु तक रहे। चूँकि धर्मसंरक्षकत्व के पहले दशकों में प्रभुधर्म के प्रमुख प्रशासनिक निकाय अंग्रेजी भाषी देशों में थे, इसलिये बहाई अवधारणाओं को अंग्रेजी में अभिव्यक्त करने और उनकी व्याख्या करने की उनकी योग्यता ने और पश्चिमी दुनिया में प्रभुधर्म के नये अनुयायियों को मार्गदर्शन प्रदान करने में अमूल्य योगदान किया।

भाषा पर धर्मसंरक्षक का अत्युत्तम अधिकार था और शब्दों के सतर्क चुनाव ने बाद में होने वाले सभी बहाई अनुवादकों के लिये एक मानदण्ड स्थापित कर दिया। उन्होंने बहाउल्लाह की प्रमुख कृतियों का अंग्रेजी में अनुवाद किया - जैसे, निगूढ़ वचन (1929), किताब-ए-ईकान (1931) और भेड़िया-पुत्र के नाम पत्र (1941) और बहाउल्लाह के पावन लेखों से चयन (1935) तथा बहाउल्लाह की प्रार्थयायें और चिन्तन-मनन। उन्होंने बहाउल्लाह, बाब और अब्दुल-बहा की अन्य अनगिनत प्रार्थनाओं का अनुवाद किया और उन्हें अपने पत्रों में शामिल किया। शोगी एफेंदी ने प्रभुधर्म के प्रारम्भिक इतिहास की अंग्रेजी में अधिकारिक प्रस्तुति “शहीदों की गाथा” (द डॉन ब्रेकर्स) (1932) में की।

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