बहाई क्या मानते हैं
बहाउल्लाह और ‘उनकी’ संविदा
शोगी एफेंदी — बहाई धर्म के संरक्षक
मार्गदर्शन और अनुवाद
- बहाई क्या मानते हैं
- सिंहावलोकन/अवलोकन
- बहाउल्लाह और ‘उनकी’ संविदा
- आत्मा का जीवन
- ईश्वर और ‘उसकी’ रचना
- आव श्यक सम्बन्ध
- विश्वव्यापी शांति
- बहाई क्या करते हैं
किसी भी धार्मिक प्रणाली की प्राथमिकताओं की सूची में उच्च स्थान पर होना चाहिए — उसके धर्मग्रंथ की प्रमाणिकता निर्धारित करना और इन पवित्र लेखों को व्यक्ति तथा सामुदायिक जीवन की परिस्थितियों में कैसे लागू किया जाए। अब्दुल-बहा द्वारा बहाई लेखों का एकमात्र अधिकृत व्याख्याता बनाए गए शोगी एफेंदी ने बहाई धर्मग्रंथों के आलोक में विश्व-घटनाओं को पढ़ा और समुदाय के साथ इन विश्लेषणों के निष्कर्ष पत्रों के रूप में साझा किए। पावन ग्रंथों के व्याख्याकार के रूप में उनकी भूमिका बहाई धर्म के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जिसने आज तक वह एकता सुनिश्चित की है, जिसने समुदाय को विभाजन से सुरक्षित रखा है।
इसी समय, विश्वभर में आकार ले रही नवोदित बहाई संस्थाएँ संरक्षक (गार्जियन) से अनगिनत विषयों पर प्रश्न पूछने लगीं, और इन प्रश्नों के उत्त र भी बहाउल्लाह के प्रकटीकरण की उनकी व्याख्या का महत्वपूर्ण भाग बन गए।
लगभग 26,000 पत्रों और हजारों तारों में, शोगी एफेंदी ने व्यक्तियों, समूहों और बहाई संस्थाओं को मार्गदर्शन, प्रेरणा और प्रोत्साहन प्रदान किया।
संरक्षक अक्सर अपने पत्रों पर हस्ताक्षर करते थे – “आपका सच्चा भाई, शोगी”
इन पत्रों में लगभग आधे फ़ारसी और अरबी में लिखे गए। अनगिनत विषयों एवं अवधारणाओं के बीच, शोगी एफेंदी ने अत्यंत सुंदर और प्रभावशाली भाषा में धर्म के विधान और मौलिक सत्य स्पष्ट किए; विश्व न्याय मंदिर की ज़िम्मेदारियों की मुख्य विशेषताएँ रेखांकित कीं; स्थानीय और राष्ट्रीय सभाओं के चुनाव और संचालन के लिए उठाए जाने वाले कदमों का विवरण दिया; और व्यक्तिगत बहाइयों के कर्तव्यों को स्पष्ट किया।
उनके पत्रों में कुछ इतने विस्तृत थे कि वे पूरे ग्रंथ के आकार के हैं। उनके सबसे महत्वपूर्ण पत्रों और संदेशों के कई संकलन प्रकाशित किए गए हैं। 1929 और 1936 के बीच लिखे सात पत्रों को 'विश्व व्यवस्था-ए-बहाउल्लाह' (The World Order of Bahá’u’lláh) शीर्षक के अंतर्गत संकलित किया गया। इनमें संरक्षक ने बहा ई धर्म के मूल सिद्धांत स्पष्ट किए, उसके विश्व मिशन की विवेचना की, उसके केन्द्रीय महान व्यक्तित्वों की सच्ची स्थिति का विवरण प्रस्तुत किया, और बहाई संस्थाओं की संरचना तथा आदेशों को प्रस्तुत किया।
शोगी एफेंदी का एक अन्य पत्र, जो 'द एडवेंट ऑफ डिवाइन जस्टिस' (The Advent of Divine Justice, 25 दिसंबर 1938) शीर्षक से प्रकाशित हुआ, उसमें उन्होंने बहाइयों को विश्वास और भाषा की संगति तथा चरित्र की सत्यनिष्ठा का आह्वान किया, जो आगे आने वाले कार्यों के निष्पादन के लिए आवश्यक थी। तीन वर्ष बाद, जब संपूर्ण विश्व संघर्ष में फँस गया था, तो 'द प्रमिस्ड डे इज़ कम' (The Promised Day Is Come, 28 मार्च 1941) के रूप में प्रकाशित पत्र में, शोगी एफेंदी ने बहाईयों को मानवता द्वारा अनुभव की जा रही “भीषण उथल-पुथल” के उद्गम, उसकी दिशा और उसकी अपरिहार्यता के विषय में आश्वस्त किया।
ईश्वर गुजर जाते हैं
शोगी एफेंदी ने अपने जीवनकाल में प्रचुर मात्रा में लेखन किया।
1940 के प्रारंभिक वर्षों में शोगी एफेंदी ने बहाई इतिहास की घटनाओं पर ध्यान केंद्रित किया और 1944 में, बाब की घोषणा की शताब्दी की स्मृति में, उन्होंने 'गॉड पासेज़ बाय' (God Passes By) प्रकाशित किया, जो उनकी अत्यंत विस्तारपूर्ण अध्ययन कृति है—बाब के अपने मिशन की पहली घोषणा से लेकर पहले “सात वर्षीय योजना” (Seven Year Plan) की पूर्ति तक पूर्ण शताब्दी को समेटती है।
इसके साथ-साथ, शोगी एफेंदी ने फ़ारसी में एक समानांतर कृति रची, जिसमें इसी प्रकार बहाई धर्म के इतिहास की समीक्षा की गई और बहाउल्लाह के लेखों में सुरक्षित विश्व व्यवस्था की विशेषताओं का विवेचन किया गया।
अनुवाद कार्य
शोगी एफेंदी बहाई लेखों के मुख्य अनुवादक रहे। उन्होंने अपना अंग्रेजी अध्ययन बचपन से ही शुरू किय ा था और युवावस्था में, अमेरिकी विश्वविद्यालय, बेरूत में तथा तत्पश्चात ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययन जारी रखा, जहाँ वे 1921 में अब्दुल-बहा के स्वर्गारोहण तक रहे। संरक्षकत्व के शुरुआती महत्वपूर्ण दशकों में प्रभुधर्म की प्रमुख प्रशासनिक संस्थायें अंग्रेज़ी भाषी देशों में स्थित थीं, ऐसे में शोगी एफेंदी की अंग्रेज़ी में बहाई अवधारणाओं को व्यक्त करने और समझाने की क्षमता, पश्चिमी जगत के नए अनुयायियों के लिए अमूल्य मार्गदर्शन का स्रोत बनी।
संरक्षक की भाषा पर विलक्षण पकड़ और शब्दों के चयन में उनकी सूक्ष्मता ने सभी भविष्य के बहाई अनुवादों के लिए मानक स्थापित किया। उन्होंने बहाउल्लाह की प्रमुख कृतियों का अंग्रेज़ी में अनुवाद किया—जैसे द हिडन वर्ड्स (1929), किताब-ए-इक़ान (1931), एपिसल टू द सन ऑफ द वुल्फ (1941)—और इनमें से तथा अन्य आवश्यक अंशों में से चयन कर उनको 'ग्लीनिंग्स फ्रॉम द राइटिंग्स ऑफ बहाउल्लाह' (1935) तथा 'प्रेयर्स एंड मेडीटेशन्स ऑफ बहाउल्लाह' (1938) जैसे संकलनों में संगठित किया। उन्होंने बहाउल्लाह, बाब और अब्दुल-बहा की अनगिनत प्रार्थनाओं और अंशों का अनुवाद किया, जिन्हें अपने पत्रों में भी सम्मिलित किया। शोगी एफेंदी ने बहाई धर्म के आरंभिक इतिहास का 'द डॉन-ब्रेकर्स' (1932) नामक अंग्रेजी में एक प्रमाणिक वृत्तांत भी तैयार किया।







