बहाई क्या करते हैं
युवा
युवा सम्मेलनों की सामग्री
प्रारम्भिक किशोरावस्था
2013 में विश्वभर में आयोजित युवा सम्मेलनों और उसके बाद की श्रृंखला में जिन प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श हुआ, उनमें एक विशेष रूप से उस अवस्था से सम्बद्ध था, जब किशोरावस्था की शुरूआत में विकसित होती हुई शक्तियों और क्षमताओं के विषय में चर्चा की गई थी।
निम्नलिखित पैराग्राफ इस विषय पर सम्मेलनों के प्रतिभागियों द्वारा अध्ययन की गई सामग्रियों से उद्धृत किये गये हैं।
12 से 15 वर्ष की आयु के बीच और बाल्यावस्था से किशोरावस्था की ओर संक्रमण को दर्शाते हुए, युवा किशोर — जिन्हें "किशोर" (जूनियर यूथ) कहा जाता है — तीव्र शारीरिक, बौद्धिक और भावनात्मक परिवर्तन अनुभव करते हैं। उनकी आध्यात्मिक शक्तियाँ प्रसारित होती हैं। एक नया स्तर की जागरूकता उनके भीतर गहन सवालों में, अपनी प्रतिभाओं और क्षमताओं में बढ़ती हुई रुचि को जन्म देती है। इस अल्प और महत्वपूर्ण तीन-वर्षीय अवधि में, व्यक्ति और समाज के बारे में वे विचार बनते हैं जो उनके पूरे शेष जीवन को आकार दे सकते हैं। हालांकि, इन नई शक्तियों की प्रसन्नता के साथ अक्सर चिंता, असहजता और संदेह की भावनाएँ भी जुड़ जाती हैं, जिनसे व्यवहार में विरोधाभास उत्पन्न हो सकता है। अतः इस उम्र में उनकी नई क्षमताओं को मानवता की निस्वार्थ सेवा की ओर निर्देशित करना आवश्यक है।
कुछ दृष्टिकोण किशोरों की इस अवस्था को सकारात्मक प्रकाश में नहीं देखते। लोकप्रिय धारणाओं के अनुसार, यह उम्र भ्रम और संकटों से भरी मानी जाती है। ऐसी सोच उन परिस्थितियों को बढ़ावा देती है जिनमें अवांछनीय व्यवहार-पैटर्न फैलते हैं। इस उम्र को सही दृष्टि से देखें तो यह ऐसी युवाशक्ति की अवस्था है जिनमें “न्याय की तीव्र भावना, ब्रह्मांड को जानने की उत्कंठा और बेहतर दुनिया के निर्माण में योगदान करने की अभिलाषा” होती है। जो नकारात्मक गुण कभी-कभी इनमें देखे जाते हैं, वे इस मानवीय जीवनावस्था के स्वाभाविक अंग नहीं हैं।
इसलिए, प्रमुख बात यह विचार करना है कि वे कौन से स्रोत हैं जिससे अवांछनीय व्यवहार-पैटर्न किशोरों में कभी-कभी प्रकट होते हैं। इस संबंध में दो बातों पर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। पहला, नकारात्मक सामाजिक ताकतों का प्रभाव–जिनके कारण अनेक समुदायों में विविध सामाजिक विकृतियाँ फैल गई हैं, जिनका युवा लोग अपने स्वयं और समाज के बारे में दृष्टिकोण पर गहरा असर पड़ता है। दूसरा, किशोरों पर वयस्कों के व्यवहार का भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। यद्यपि वे इस उम्र में अनेक गहरे विषयों के प्रति अंतर्दृष्टि प्राप्त कर रहे होते हैं, वयस्क प्रायः उन्हें बच्चों-जैसा ही मानते रहते हैं। साथ ही, कुछ वयस्क कभी-कभी अपने शब्दों और कर्मों के बीच अंतर दिखाते हैं, जिससे जीवन को अपनाने योग्य आदर्शों की तलाश में लगे इन युवा लोगों में भ्रम पैदा हो सकता है।
किशोरों पर नकारात्मक सामाजिक ताकतों के प्रभाव को रेखांकित करने का अर्थ यह नहीं है कि युवा मूलतः कोमल या कमज़ोर हैं। वे, सहायता मिलने पर, इन ताकतों का सामना कर सकते हैं। वे आत्मा और मस्तिष्क की शक्तियों को विकसित कर सकते हैं, जो न सिर्फ उन्हें इन चुनौतियों से ऊपर उठने में समर्थ बनाती हैं, बल्कि उन्हें एक नए समाज के निर्माण में भागीदार भी बनाती हैं।
चिंतन संबंधी प्रश्न
अपने समुदाय के किशोरों के बारे में सोचते हुए चर्चा करें कि वे विनाशकारी शक्तियों और उनके द्वारा उत्पन्न होने वाले व्यवहार के प्रतिमानों से किस प्रकार प्रभावित हो रहे हैं।
वर्णन करें कि आपके समुदाय के किशोर किस प्रकार आध्यात्मिक और बौद्धिक रूप से प्रगति कर रहे हैं और वे अपने परिवारों और समुदायों की प्रगति में योगदान करने के लिए किस प्रकार सीख रहे हैं।
उन आध्यात्मिक गुणों और अभिवृत्तियों पर चर्चा करें जिन्हें, आपके विचार में, किशोरों के एक समूह का समर्थन कर रहा व्यक्ति अपने व्यवहार में लाने का प्रयास करे।



