बहाई क्या करते हैं
युवा
युवा सम्मेलनों की सामग्री
समुदाय निर्माण और आपसी सहयोग को पोषित करना
2013 में दुनिया भर में आयोजित युवा सम्मेलनों की श्रृंखला और उसके बाद हुई सम्मेलनों की लहर के दौरान जिन विषयों की चर्चा की गई उनमें सामुदायिक निर्माण और परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने से संबंधित विषय शामिल थे।
निम्नलिखित पैराग्राफ उन सामग्रियों से लिये गये हैं जिन्हें सम्मेलनों के प्रतिभागियों ने इन विषयों पर अध्ययन किया था।
समाज की उन्नति में योगदान देने की एक महान ज़िम्मेदारी आज की पीढ़ी के युवाओं के सामने है। उन पर यह कर्तव्य भी है कि वे ऐसा वातावरण बनाएं जिसमें समाज के कम उम्र के सदस्य वे आध्यात्मिक और बौद्धिक शक्तियाँ प्राप्त कर सकें जो एक नई सभ्यता के निर्माता बनने के लिए आवश्यक हैं। निःसंदेह यह कार्य बहुत विशाल है। अपनी शक्तियों की क्षय और उद्देश्य की विकृति का कारण बनने वाली शक्तिशाल ी सामाजिक ताक़तों का मुकाबला करने के लिए युवा ईश्वर की अचूक सहायता पर निर्भर रह सकते हैं। साथ ही, उन्हें स्वयं और अपने समुदायों में आपसी सहयोग और मदद के वातावरण को बनाने की क्षमता को भी सशक्त बनाना होगा, जिससे समाज को रूपांतरित करने की उनकी शक्ति कई गुना बढ़ सके।
अब आपसे यह अपेक्षा की जाती है कि आप इस पर चिन्तन करें कि आपकी पीढ़ी अपने मोहल्लों और गाँवों में, और अन्य ऐसे स्थानों पर जहाँ सामूहिक रूपांतरण में भागीदारी के इच्छुक लोग हैं, जीवंत समुदायों के निर्माण में क्या योगदान दे सकती है।
इस प्रश्न पर विचार करने के लिए, यह आवश्यक है कि कार्य की रूपरेखा के कुछ घटकों का संक्षिप्त रूप से पुनरावलोकन किया जाए, जो विश्वव्यापी बहाई समुदाय के प्रयासों का मार्गदर्शन करती है। बहाउल्लाह की शिक्षाओं से प्रेरित नई समाज-व्यवस्था के निर्माण के लिए बहाई समुदाय की अधिकांश गतिविधियाँ 'क्लस्टर' के संदर्भ में होती हैं। 'क्लस्टर' एक मिलाजुला भौगोलिक क्षेत्र होता है, जिसमें गाँव—और संभवतः कोई छोटा नगर—या कोई बड़ा शहर और उसके उपनगर शामिल होते हैं। प्रत्येक क्लस्टर में मुख्य उद्देश्य होता है—बहाई शिक्षाओं के अनुप्रयोग द्वारा—परिवर्तन की प्रक्रिया के तीन मुख्य पात्रों: व्यक्ति, समुदाय और संस्था को सशक्त बनाना। इस कार्य में शुमार है, ‘इंस्टीट्यूट प्रक्रिया’ के माध्यम से आध्यात्मिक एवं सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देने में सक्षम लोगों की संख्या बढ़ाना; ऐसे जीवंत स्थानीय समुदायों की रचना करना, जहाँ “व्यक्ति, परिवार और संस्थाएं ... [लोगों के] अपने और अपनी सीमाओं से बाहर के लोगों के कल्याण के लिए एक साझा उद्देश्य के साथ संगठित रूप से कार्य करें”; और संसाधन जुटाने, दिशा देने और सेवा करने के इच्छुक अनेक मित्रों की ऊर्जा को एकीकृत करने की क्षमता वाली संस्थाओं का विकास करना। प्रत्येक क्लस्टर, वहाँ बदलाव के लिए जुटे व्यक्तियों की संख्या और उनकी दक्षता तथा स्थानीय समुदाय और संस्थाओं की मजबूती और प्रगति के आधार पर, ज़रूरी नहीं कि एक ही स्तर पर हो। कुछ में, बहाई समुदाय के नए समाज के निर्माण के प्रयास अभी शुरू भी नहीं हुए हैं।
हर क्लस्टर में मित्रगण अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करते हैं। इनमे से बहुत से लोग या तो ग्रामीण क्षेत्रों के एकरूपता वाले गाँवों में रहते हैं, या फिर प्रायः विविधता से भरे बड़े शहरों के मोहल्लों में। कुछ क्षेत्रों में मजबूत सामुदायिक भावना है, जबकि अन्य में उसकी स्पष्ट अनुपस्थिति देखी जाती है। एक क्लस्टर के मित्रगण कुछ समान रुचियों के चलते भी अन्य लोगों के साथ संबंध बना सकते हैं, जैसे कि—किसी विशेष विश्वविद्यालय में पढ़ाई करना, या किसी पेशेवर अथवा सामाजिक संगठन के सदस्य होना, जो किसी निर्दिष्ट भौगोलिक स्थान तक सीमित नहीं है। एक नया समाज बनाने के लिए, मित्र इन स्थानों एवं अवसरों में बहाउल्लाह की शिक्षाओं को लागू करने की सामर्थ्य बढ़ाने का प्रयास करते हैं। किसी भी समाज में, उसके सदस्यों की निःस्वार्थ सेवाओं के बिना, इस मानव जीवन काल में संभव आध्यात्मिक एवं सामाजिक प्रगति नहीं हो सकती।
युवापीढ़ी के सेवा पथ पर चलने के प्रयासों पर विचार करते समय यह सोचना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वे किस प्रकार ‘मोहल्लों और गाँवों में जीवंत सामुदायिक जीवन को प्रोत्साहित’ कर सकते हैं।
चिंतन संबंधी प्रश्न
आप मित्रता की सच्ची प्रकृति को किस रूप में देखते हैं? आप किस प्रकार यह निर्धारित करेंगे कि कौन-सी मित्रताएँ युवाओं की प्रगति में सहायक हैं और कौन-सी बाधक?
पारस्परिक सहायता के वातावरण का निर्माण करने में ज़्यादा संख्या में युवाओं की ऐसी कल्पना शामिल है, जो सच्चे मित्र के रूप में मिलकर अपने समुदाय को रूपांतरित करने का कार्य करें। अपने क्लस्टर या समुदाय में आप ऐसी कल्पना को साकार करने के लिए क्या कदम उठाएँगे? युवाओं के बीच संवाद कितना महत्वपूर्ण होगा, और उसका उद्देश्य तथा विषय-वस्तु क्या होगी?
बहाउल्लाह के संदेश से प्रेरित सामुदायिक निर्माण की प्रक्रिया के केन्द्र में Faith की शिक्षाओं और उसके समाज के जीवन पर प्रभाव को लेकर सतत चलने वाला संवाद होना चाहिये। आप क्या कर सकते हैं जिससे बड़ी संख्या में युवा इस संवाद का हिस्सा बनें और इससे संबंधित अध्ययन व सेवा की अनिवार्य प्रक्रिया में सहभागी हों?
आपके समुदाय में परामर्श की प्रक्रियाओं को सशक्त करने के लिए युवा क्या योगदान दे रहे हैं या दे सकते हैं?







