“ये पावन अवतार संसार में आने वाले वसंतऋतु के समान हैं...क्योंकि प्रत्येक वसंत एक नये सर्जन का काल होता है।”— अब्दुल-बहा

बहाई धर्म का आरम्भ ईश्वर द्वारा दो दिव्य संदेशवाहकों को दिये गये मिशन के साथ हुआ। ये संदेशवाहक थे बाब और बहाउल्लाह। बहाई धर्म की विशिष्ट एकता जो उन्होंने स्थापित की वह आज बहाउल्लाह द्वारा दिये गये स्पष्ट आदेशों से फूटी शाखा है, जिसने ‘उनके’ स्वर्गारोहण के बाद भी मार्गनिर्देश की निरन्तरता का आश्वासन दिया है। संविदा के नाम से जाना जाने वाला यह उत्तराधिकार बहाउल्लाह से ‘उनके’ पुत्र अब्दुल-बहा और बाद में ‘उनके’ नाती शोगी एफेंदी और विश्व न्याय मंदिर को मिला, जैसा आदेश बहाउल्लाह द्वारा दिया गया था। एक बहाई बाब, बहाउल्लाह तथा नियुक्त उत्तराधिकारियों की दिव्य सत्ता को स्वीकार करता है।

बाब »

(1819-1850)

बाब बहाई धर्म के अग्रदूत हैं। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में उन्होंने घोषणा की कि वह एक ऐसे संदेश के संवाहक हैं जो मानवजाति के आध्यात्मिक जीवन में परिवर्तन को नियत करेगा। उनका मिशन अपने से भी महानतर ईश्वर के संदेशवाहक के आने के लिये मार्ग प्रशस्त करना था, जो शांति और न्याय के युग का आरम्भ करेंगे।

बहाउल्लाह »

(1817-1892)

बहाउल्लाह-“ईश्वर की महिमा” - वह प्रतिज्ञापित अवतार हैं, जिनके अवतरण की पूर्वघोषणा बाब और पहले के सभी दिव्य संदेशवाहकों ने की थी। बहाउल्लाह ने ईश्वर का एक नया प्रकटीकरण मानवजाति को दिया। उनकी लेखनी से हज़ारों पद्य, पत्र और पुस्तकें प्रवाहित हुईं। अपने पावन लेखों में उन्होंने एक विश्व-सभ्यता की रूपरेखा प्रस्तुत की, जो मानव-जीवन के दोनों आयामों - आध्यात्मिक और भौतिक - का विवरण प्रस्तुत करते हैं। इसके लिये उन्होंने 40 साल की कैद, यंत्रणा और निष्कासन की पीड़ा सही।

अब्दुल-बहा »

(1844-1921)

बहाउल्लाह ने अपनी वसीयत में अपने ज्येष्ठ पुत्र, अब्दुल-बहा को अपनी शिक्षाओं का अधिकृत व्याख्याता और प्रभुधर्म का प्रधान नियुक्त किया। पूरब और पश्चिम के देशों में अब्दुल-बहा शांतिदूत, अनुकरणीय व्यक्तित्व और एक नये धर्म के प्रतिनिधि के रूप में पहचाने जाने लगे।

शोगी एफेंदी »

(1897-1957)

अब्दुल-बहा द्वारा बहाई धर्म के संरक्षक के रूप में नियुक्त किये गये उनके ज्येष्ठ नाती शोगी एफेंदी ने एक योजनाबद्ध तरीके से बहाई समुदाय के विकास और इसकी गहरी समझ तथा विविधताओं को प्रतिबिम्बित करते समुदाय के लोगों की एकता को सशक्त करते हुए उनका लगातार 36 सालों तक सम्पोषण किया।

विश्व न्याय मंदिर »

(सन् 1963 में स्थापित)

आज पूरी दुनिया में बहाई धर्म का विकास विश्व न्याय मंदिर के मार्गदर्शन में हो रहा है। विधानों की अपनी पुस्तक में बहाउल्लाह ने विश्व न्याय मंदिर को आदेश दिया है कि वह मानवजाति के कल्याण के लिये सकारात्मक प्रभाव वाले कार्य करे, शिक्षा, शांति और विश्वव्यापी समृद्धि को बढ़ावा दे और मानव-सम्मान तथा धर्म के स्थान को सुरक्षा प्रदान करे।