जिस आधारशिला पर यह प्रशासनिक व्यवस्था खड़ी की गई है वह मानवजाति के लिये इस युग में ईश्वर का अपरिवर्तनीय महान उद्देश्य है। वह उद्गम जहाँ से यह प्रेरणा ग्रहण करती है, कोई और नहीं, स्वयं बहाउल्लाह हैं।” -शोगी एफेंदी

बहाई प्रशासनिक व्यवस्था

बहाई समुदाय के कार्य संस्थाओं की एक प्रणाली के माध्यम से संचालित किये जाते हैं, प्रत्येक का एक निर्धारित कार्य-क्षेत्र है। इस प्रणाली का उद्गम, जो बहाई प्रशासनिक व्यवस्था के रूप में जानी जाती है, स्वयं बहाउल्लाह के पावन लेखों में पाया जाता है। उन्होंने सिद्धांतों को प्रकट किया, जो उसके संचालन का मार्गदर्शन करते हैं, ‘उन्होंने’ इसकी संस्थाओं को स्थापित किया, अब्दुल-बहा को अपने शब्दों का एकमात्र व्याख्याकार नियुक्त किया और विश्व न्याय मंदिर को अधिकार प्रदान किये। अब्दुल-बहा ने अपने “ इच्छापत्र और वसीयतनामा ” में अपने नाती शोगी एफेंदी को बहाई धर्म का संरक्षक नियुक्त किया। अपने कार्यकाल के आरम्भ से ही शोगी एफेंदी ने अपनी पूरी ताकत ‘प्रशासनिक व्यवस्था’ को विकसित करने में लगा दी, इसके अस्तित्व को प्रारम्भिक अवस्था में लाया और विश्व न्याय मंदिर के चुनाव के लिये मार्ग प्रशस्त किया।

आज विश्व न्याय मंदिर ‘प्रशासनिक व्यवस्था’ का केन्द्रीय शासी निकाय है। उसके मार्गदर्शन में स्थानीय आध्यात्मिक सभाओं और राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभाओं के नाम से जाने जानी वाली निर्वाचित संस्थायें अपने-अपने स्तर पर बहाई समुदाय के काम-काज की देख-भाल करती हैं और विधायी, कार्यकारिणी तथा न्यायपालिका के अधिकारों का संवहन करती हैं। जानी-मानी क्षमता वाले मनोनीत लोगों की संस्था - सलाहकारों की संस्था - भी विश्व न्याय मंदिर के मार्गदर्शन में काम करती है और बहाई समुदाय के तृणमूल स्तर से अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक के जीवन पर अपना प्रभाव डालती है। इस संस्था के सदस्य काम करने का प्रोत्साहन देते हैं, व्यक्तिगत पहल को बढ़ावा देते हैं और बहाई समुदाय में सीखने की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करते हैं। इसके अतिरिक्त आध्यात्मिक सभाओं को सलाह देते हैं।

अपनी-अपनी भूमिका अदा करते हुये सलाहकारों और आध्यात्मिक सभाओं की संस्थायें बहाई धर्म के संरक्षण और प्रसार के लिये अपनी जिम्मेदारियां साझा करते हैं। उनके बीच के समरसतापूर्ण पारस्परिक प्रभाव पूरी दुनिया के बहाई समुदाय के सदस्यों का निरन्तर मार्गदर्शन, प्रेम और प्रोत्साहन सुनिश्चित करते हैं। साथ-साथ, वे व्यक्तिगत स्तर पर तथा सामूहिक रूप से किये गये प्रयासों को समाज के कल्याण में योगदान देने के लिये बल प्रदान करते हैं।

बहाई संस्थाओं की परिकल्पना केवल बहाई सामुदायिक जीवन के आन्तरिक मामलों की देख-रेख के एक साधन के रूप में नहीं की गई है, हालाँकि यह आवश्यक है। सबसे पहले, प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य उस माध्यम के रूप में काम करना है, जिससे होकर प्रभुधर्म की चेतना प्रवाहित होनी है और अपने संचालन में इस प्रकार के सम्बन्धों को समाहित किये हो जो, जैसे-जैसे मानवता सामूहिक वयस्कता की ओर बढ़े, अवश्य ही उसे एकजुट करे तथा उसे बनाये रखे।


“स्वयं ’उसके‘ द्वारा सृजित नई विश्व व्यवस्था, जो प्रशासनिक संस्थाओं के गर्भ में फिलहाल हलचल मचा रही है, का यह ढाँचा ही है जो एक प्रतिमान और एक नाभिक - दोनों के रूप में उस विश्व राष्ट्रमंडल का काम करेगा जो धरती के लोगों और राष्ट्रों के लिये विश्वस्त और अनिवार्य नियति होगी।”

— शोगी एफेंदी

नोट: