बहाई क्या मानते हैं
उपासना
परिचय
- बहाई क्या मानते हैं
- बहाई क ्या करते हैं
उपासना के कार्य धार्मिक जीवन के स्वाभावि क अंग हैं। इनके माध्यम से व्यक्ति और समुदाय निरंतर ईश्वर और मानव के बीच विद्यमान उस विशिष्ट संबंध को सुदृढ़ करते हैं। यह संबंध समाज को बनाये रखने वाले संबंधों — व्यक्तियों के बीच, समुदाय के विभिन्न अंगों और उसकी संस्थाओं के बीच — को प्राणवंत करता है।
प्रार्थना हमारे आध्यात्मिक पोषण और विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके माध्यम से हम ईश्वर की स्तुति कर सकते हैं, अपने प्रेम को प्रकट कर सकते हैं, और उसकी सहायता की याचना भी कर सकते हैं। ध्यान-चिंतन करने की क्षमता मनुष्य की विशेष पहचान है। वस्तुतः, बहाई लेखों में कहा गया है कि चिंतन और मनन के बिना मानव-प्रगति असंभव है। उपवास और तीर्थयात्रा उपासना के दो अन्य कार्य हैं, जिन्होंने मानव-इतिहास में धार्मिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जब कार्य सेवा-भावना के साथ किया जाता है तो उसे भी उपासना का कार्य माना जा सकता है।
अत्यधिक हर्ष और मिलन की भावना के साथ एकत्रित होइए और दयालु प्रभु द्वारा प्रकट की गई आयतों का पाठ कीजिए। ऐसा करने से आपके अंत:करण में सच्चे ज्ञान के द्वार खुलेंगे और आप अपनी आत्माओं को दृढ़ता से परिपूर्ण और अपने ह ृदयों को उज्जवल आनंद से भरा हुआ अनुभव करेंगे।









